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सुल्तानगंज नगर परिषद में दिनदहाड़े हत्या पर गरमाई सियासत, तेजस्वी यादव ने सरकार पर साधा निशाना

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भागलपुर के सुल्तानगंज में नगर परिषद कार्यालय में हुई गोलीबारी और EO की हत्या के बाद तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।

भागलपुर/आलम की खबर:भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में दिनदहाड़े हुई गोलीबारी और कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण की हत्या के बाद बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। इस गंभीर घटना पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह घटना राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था का उदाहरण है और सरकार अपराध नियंत्रण में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने अपने पोस्ट में सरकार पर निशाना साधते हुए इसे “कानून-व्यवस्था की असफलता” बताया और दावा किया कि बिहार में अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है जब सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में मंगलवार दोपहर तीन नकाबपोश अपराधियों ने घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि नगर परिषद सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना उस समय हुई जब कार्यालय में विज्ञापन ठेकों की नीलामी प्रक्रिया समाप्त हो चुकी थी और अधिकारी अपने कक्ष में बैठक कर रहे थे। इसी दौरान अपराधी हथियारों के साथ अंदर घुसे और बिना किसी चेतावनी के ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

घटना के बाद कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की मदद से दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने कृष्ण भूषण को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल सभापति को बेहतर इलाज के लिए भागलपुर के मायागंज स्थित JLNMCH रेफर किया गया, जहां वे आईसीयू में भर्ती हैं।इस जघन्य वारदात के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है। भागलपुर एसएसपी सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच चुका है और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने भी जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है और अपराधियों की पहचान के लिए तकनीकी जांच तेज कर दी गई है।

प्रारंभिक जांच में इस हमले को स्थानीय स्तर पर वर्चस्व की लड़ाई और ठेका प्रक्रिया से जुड़े विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि पुलिस ने अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है और जल्द ही अपराधियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला अब राज्य की कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाएं प्रशासनिक विफलता को उजागर करती हैं, जबकि सरकार की ओर से अब तक इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टि:

इस घटना ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या सरकारी कार्यालय भी अब सुरक्षित नहीं रह गए हैं। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अपराध पर नियंत्रण और प्रशासनिक सुरक्षा दोनों को मजबूत करने की आवश्यकता है।

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